Wednesday, December 7, 2011

वलय ...


वगळून मला तुझ्या वलयातून..
जाणीव करून दिलीस पुन्हा जगण्याची..
मी आठवणीने वळून पाहीले मागे..
जाणीव करून दिलीस पुढे निघण्याची..!!

स्वत्वास हरवूनी तुझ्यात रुजले होते..
कधी बहर कधी शिशिरात निपजले होते..
या अस्तित्वाचा एकवटून पाचोळा..
जाणीव करुन दिलीस पुन्हा सजण्याची..!!

ही किमया कुठली जिने बदलले ऋतू..
सारेच पलटले डाव नि अवघे मी तू..
स्वप्नांची झटकून.. धूळ उघडूनी डोळे..
जाणीव करुन दिलीस पुन्हा बघण्याची.. !!

रसभंग...


सारी रैन भरे नैन..
गहजब कौनो चैन..
रसभंग किये संग..
पल पल बेचैन..
राधा शाम बिन प्यासी..
गहरी सी यह उदासी..
मोसे बिना तोले बोल
हल नाही देवदासी..
नजरोंकी हेराफेरी..
दाग जोबन पे गोरी..
सरमाये अब काहे..
पूरी जिम्मेदारी तोरी..
जाके यमुना किनारे..
संग रास रचाये..
दिये प्रीत के जले..
पर रैन ना आये..
सालोसाल चले है..
वंश रित पले है..
तन मन का मिलन..
जैसे शाम ढले है.. !!

Saturday, December 3, 2011

कोशीश...


हमारी जरुरत नही तो कह देना
दूर होने की कोशीश तो करेंगे..
वादा करना शायद मुनासिफ ना होगा..
पर रोने से बेहतर तो हसकर मरेंगे..

किसीने कहा है.. प्यार एक ही बार होता है..
और हमने भी पहली और आखरी बार किया..
शायद आपके लिये हम दुसरे होंगे..
पर हम ने सब कुछ् आपही पे हार दिया..

काश हमारे जजबात आप सुन पाते..
तो हमे कहने की जरुरत ना होती..
शायरी लिखने का शौक तो नही है..
पर लफ्जोंकी अश्को पर हुकुमत ना होती...

हम समझते है.. आप भी समझ लेंगे,,
हमारी खुशी.. जो आप से जुडी है..
बस एक बार हमे अपना कह दो..
फिर जो चाहे करलो.. पूरी जिंदगी पडी है !!!

Monday, November 21, 2011


शुभ्र कळ्यांचा नाद खुळा..
देठ केशरी .. मूक लळा..
पराग इवले.. मध्यावरती.
पाकळीतला गोड गळा..!! :)

दर्द..


फुल खिलते हुए अच्छे लगते है.. मुरझाये तो दर्द..
सवाल सुलझे हुए अच्छे लगते है.. उलझाये तो दर्द..

कदम बढते हुए अच्छे लगते है.. रुक जाये तो दर्द..
इरादे बनते हुए अच्छे लगते है.. टूट जाये तो दर्द..

राज सहमे हुए अच्छे लगते है.. खुल जाये तो दर्द..
अल्फाज सजते हुए अच्छे लगते है.. चुभ जाये तो दर्द..

लोग मिलते हुए अच्छे लगते है.. दूर जाये तो दर्द..
साथ रहते हुए अच्छे लगते है.. बिछड जाये तो दर्द..

आप हसते हुए अच्छे लगते है.. रुठ जाये तो दर्द..
हात थामे हुए अच्छे लगते है.. छूट जाये तो दर्द..

जिंदगी जिते हुए अच्छे लगते है.. मर जाये तो दर्द..
वक्त थामे हुए अच्छे लगते है.. गुजर जाये तो दर्द..!!

शिकायत...


शिकायत आपहीसे करेंगे बेहीसाब
के वक्त के मामले में... आप बुझ्दील है..
क्या जिंदगी इतनी खफा है हमसे
के वक्त का मिलना ही मुश्कील है ... ??

आदत से मजबूर आदते
अगर सपनों को करती है निलाम..
फिर आप के होते हुए जिंदगीमें
जिंदगी को क्या हासिल है.. ??

सवाल उलझाते है अक्सर..
जवाब कही मिलता नही..
शक्स जो सबसे प्यारा है..
वही अरमानोंका कातील है ..

पुछकर भी बेमतलब..
जान कर भी अंजान..
जिंदगी का अधूरा ख्वाब..
बेखुदी में शामील है..

चुप रह कर बयान करु..
ऐसी तरकीब सिखा खुदा..
उन से शुरु.. उन्ही पे खतम..
इतनी मेरी मंजिल है !!!!

Sunday, November 6, 2011

सुगंध.. मोगर्‍याचा !!


कळी अत्तराची.. गोफ केशराचा..
देठ हिरकणीचा .. गजर्‍याचा.
मोतियाचे मणी.. माळताच वेणी..
दरवळे सुगंध.. मोगर्‍याचा.. !!!!