Friday, June 6, 2008

कभी कभी..


एक अधुरापनसा जिंदगीमे
मेहसूस होता है कभी कभी..
सबकुछ है साथ.. फिर भी
एक कमी सी लगती है कभी कभी..

खुशियोंका आंगन है..
अरमानोंका सागर है..
फिर भी..
किसी गम की लहर से आंखोमे..
नमी सी लगती है कभी कभी..!

खैर.. कुछ लम्हे थे..
जिन्हे भुलना नामुमकीन है..
दिल के कोने मे.. यादोंकी मेहफिल..
जमी सी लगती है कभी कभी..

कोशीश तो जारी है..
उम्मीद के संग चलने की..
फिर भी.. किसी मोड पर जिंदगी..
थमी सी लगती है कभी कभी..!!!

1 comment:

Yogi... Yo Rocks.. !! said...

जी चाहता है कभी कभी..
आपकि पंक्तियोंको मिठे सुर मिले..
तो महशुर होयेंगे आप,
और आपकी गझले कभी ना कभी..