बारीशे कितनी देखी.. पर हम प्यासे ही रहे
कभी बूंदो की तरह बरस आसू भी बहे..
सुना बूंदो के जमने से बनते है मोती
पर हमारी किस्मत ने पत्थर ही सहे..
वह बचपन की कश्ती और सावन का पानी
है सुनी जवानी.. खफा हम रहे..
वह बारीश का आना.. और फिर भिग जाना..
बिना कुछ बताये.. बिना कुछ कहे !!
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