Tuesday, September 4, 2012

"Chehra"


Log Chehre Se Insaan Parakhte Hai.. Par Dil Ke Jazbaat Koi Samzta Nahi..
Yeh Duniya Dikhaave Par Chalti Hai.. Yaha Saccha Kaun?
Koi Parkhta Nahi..

Koi Rang - Rup Se Naakhush Hai.. Koi Kimat Se.. Ehmiyat Se..
Chehre Pe Chadhaye Rang Yahaan… Behkaaye Gujri Niyatse..

Unchaai Kad Ki Dekhe Koi  Rota Hai Ghut Ghut Ke Yaha..
Aur Usi Chaah Se Khele Koi..Khudki Apni Sehte Se..

Ho Chhota Kad Par Badi Muraade.. Sacchi Jiski Kismat Hai..
Chuye Woh Ambar Ki Unchai..Khoon Pasina Mehnatse…

Tarakib Maayne Rakhti Hai.. Taqdeer Yaha To Sabki Hai..
Vishvas Khuda Aur Khud Par Ho To.. Mumkin Hai Sab Himmat Se..

Jo Toke Us Se Keh Denaa- In Najrose Bhi Dekho Jahan..
Khaamiya Bhale Kitni Bhi Ho..Par Jaise Bhi Hum Khush Hai Yahan..

Yeh Ek Chehra Asli Ho.. Baki Ho Nakli Kitne Bhi..
Us Apne Chehre Se Yun Mohobbat Karo Humesha Sada Sabhi ..!!

Friday, July 27, 2012

वेडं होऊन जगावं..!!


शहाणं होऊन कुणाचं भलं झालंय ??
म्हटलं वेडं होऊन बघावं..
शहाण्यासारखे सगळेच वागतात..
आपण वेडं होऊन जगावं..!!

वेड लागल्याशिवाय म्हणे
इतिहास कधीच घडत नसतो..
तहान लागल्याखेरिज कुणी
विहीर सुद्धा खणत नसतो..
आपण आपलं.. आपल्या पुरतं
पाणी चाखून निघावं..
शहाण्यासारखे सगळेच वागतात..
आपण वेडं होऊन जगावं..!!

वर्षोंवर्ष नद्या वाहतात..
समुद्राला जाऊन मिळतात..
प्रवाहातले दगड गोटे..
गुळ्गुळीत होत जातात..
आपण मात्र प्रवाहाच्या
विरोधात निघावं..
शहाण्यासारखे सगळेच वागतात..
आपण वेडं होऊन जगावं..!!

कारण.. इथल्या जगात कुणीच
कुणासाठी थांबत नाही..
प्रत्येकाचे डावपेच..
कुणालाही सांगत नाही..
आपली वाट आपण शोधून
पुढल्या शोधात निघावं..
शहाण्यासारखे सगळेच वागतात..
आपण वेडं होऊन जगावं..!!

Sunday, July 8, 2012

बारीशे...


बारीशे कितनी देखी.. पर हम प्यासे ही रहे
कभी बूंदो की तरह बरस आसू भी बहे..

सुना बूंदो के जमने से बनते है मोती
पर हमारी किस्मत ने पत्थर ही सहे..

वह बचपन की कश्ती और सावन का पानी
है सुनी जवानी.. खफा हम रहे..

वह बारीश का आना.. और फिर भिग जाना..
बिना कुछ बताये.. बिना कुछ कहे !!

Sunday, May 6, 2012

मुक्यांची शाळा !!

रोज सकाळी रोजच्याच त्या वाटेवरुनी जाताना..
गर्दीमधले कित्येक चेहरे येता जाता पाहताना..
दिसली होती शाळेमधल्या गणावेशातील चार मुले..
भाषा त्यांची दुर्मिळ अवघी शब्दांनाही जी ना कळे..
चेहर्‍यावरती हसरे भाव.. उसंत नाही हातांना..
हृदयामधली शब्द-संपदा कळली होती बोटांना..
नजरे मधूनी सांधत होती संवादाचा सेतू जणू..
अबोल वाणी वदते - हसते.. या सार्‍याला काय म्हणू..
मला त्या क्षणी इतुके कळले.. कशास शब्दांची चाकरी..
भाषेमधले पंडीत आम्ही.. भावना तरी शून्य उरी..
धडधाकट मी.. अगाध वाचा.. तरी बोलूनी सुके गळा..
मी तर पंगू.. माझ्याहूनही सूज्ञ मुक्यांची ती शाळा..!!!

सत्यमेव जयते !!!

"स"भी जझबा रखते है.. पर जुनून नही पानेका..
"त"हे दिल से शुक्रीया.. हमारी आवाज पोहोचानेका..
"य"ह दबी दिल की धडकन बडा परेशानसा करती है..
"मे"हसूस होती है.. फिर भी बताने से डरती है..
"व"जूद जिंदगी का जब सवाल उठाता है..
"ज"रुरतों की भीड में तनहा रह जाता है..
"य"ह सच्चाई की लढाई में तेरा साथ सभी देंगे हम..
"ते"री कोशीश दिल को छू गयी.. जुनून जागा.. आंखे हुइ नम !!

Friday, January 27, 2012

Woh....


Jin ke Naam Puri Zindagi Kar Di..
Woh Humara Naam Tak Lene Itraate Hai..
Hum Har Khushi Me Unhe Karte Hai Shamil..
Aur Woh Ghum Me bhi Hume Thukraate Hai..

Aey Khuda.. Kya Yeh Zindagi Hai..
Jahan Jarurat Par rishte Ban Jaate Hai..
Khatm Hote hi Dil Ka Wasta Sab..
Alvida Kar Ke Chale Jaate Hai..

Tum Aise Naa Karo.. Kaho gar Thak Gaye..
Humare Majboor Halaton Se..
woh Zindagi Ka aakhri Din Hoga..
Jab tum Ruth Jaaoge In Baaton se...!!!

Friday, January 6, 2012

Bulandi !!!


Khud ki Bulandi ka Khud hi Intejaam Kar
Tu Dil Laga Ke Bass Dil Se Nek Kaam Kar..
Humari Duvaonka Sahara Nahi Lagega Bas..
Khud Ki Ibaadat Se Roshan Khud Ka naam Kar !!